Tuesday, October 11, 2011

राम के दीवाने : छत्तीसगढ़ के रामनामी

                    
         
                वैसे तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम सम्पूर्ण भारत भूमि के प्यारे,दुलारे अनमोल रत्न हैं लेकिन  छत्तीसगढ़ के साथ  मामा-भांजे का नाता होने के कारण यहाँ के जन-जन में उनके प्रति गहरा आत्मीय जुड़ाव है. इतिहास में छत्तीसगढ़ दक्षिण कोशल के नाम से प्रसिद्ध है.  पौराणिक इतिहासकारों के अनुसार भानुमंत दक्षिण कोशल के राजा थे और कौशल्या  उनकी बेटी , जिनका ब्याह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ था. माता कौशल्या ने तेजस्वी और यशस्वी पुत्र श्रीराम को जन्म दिया ,जो आगे चलकर मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से सम्पूर्ण भारत वर्ष के आराध्य बने . माता कौशल्या का मायका दक्षिण कोशल यानी छत्तीसगढ़ था ,इसलिए छत्तीसगढ़ के लोग उन्हें आत्मीय स्नेह से एक बहिन  मानते आ रहे हैं.इस नाते उनके सुपुत्र भगवान श्रीराम छत्तीसगढ़ वासियों के भांजे हुए .तभी तो यहाँ आज भी अधिकाँश इलाकों में लोग अपने भाँजों के चरण छूकर उनका आशीष प्राप्त करने में गर्व महसूस करते हैं. भांजे का चरण स्पर्श भगवान श्रीराम को प्रणाम करने जैसा है. कई विद्वानों ने अपने कई वर्षों के गहरे अध्ययन और अनुसंधान से  श्रीराम का वन-गमन पथ भी छत्तीसगढ़ में चिन्हांकित किया है.
                    राज्य के जांजगीर-चाम्पा , रायगढ़ , रायपुर और बिलासपुर जिलों के परस्पर जुड़ते सरहदी अंचल में महानदी के तटवर्ती कई गाँवों में रामनामी समुदाय के लोग निवास करते हैं .मर्यादा पुरुषोत्तम  के महान करिश्माई व्यक्तित्व का अमिट प्रभाव इनकी जीवन-शैली में साफ़ देखा जा सकता है. सिर से पाँव तक अमिट अक्षरों में  'राम-राम' इनके पूरे बदन में लिखा हुआ या कह लें कि छपा हुआ मिलता है.  राम के ऐसे दीवाने भक्त और कहाँ मिलेंगे ,जो शरीर में गोदना गोदवाने की  कष्टदायक प्रक्रिया को भी  प्रसन्नता के साथ सहकर अपने पूरे शरीर में राम का नाम अंकित करवाते हैं . जब मन में राम बसा हो ,तो फिर अपने  तन  को तकलीफ कैसी और जब श्रीराम का नाम अंकित हो रहा है ,तो शरीर को आखिर कष्ट कैसा ? इनके परम्परागत कपड़ों में भी राम का ही नाम छपा हुआ मिलेगा .इसके लिए ये लोग गाँव में ही वृक्षों की छाल को उबाल कर प्राकृतिक रंग तैयार कर कपड़ों में राम नाम का की छपाई कर लेते हैं .जितना सहज, सरल और शांत जीवन है इनका , उतना ही सौम्य स्वभाव .  भगवान श्रीराम की भक्ति और ग्रामीण भारत की कृषि-प्रधान जीवन शैली के सम्मिश्रण से बना है इनका सम्पूर्ण व्यक्तित्व . भारत की विविधतापूर्ण इन्द्रधनुषी संस्कृति की तरह उसके नये राज्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति भी वाकई बहुरंगी है.  'कोस-कोस में पानी बदले ,तीन कोस में बानी ' की प्रसिद्ध कहावत यहाँ भी लागू होती है . ऐसे रंग-बिरंगे सांस्कृतिक परिदृश्य में रामनामी समुदाय की सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं के रंग भी अपनी पूरी आभा के साथ खिलते नजर आते हैं ,जो वास्तव में यह भी साबित करते हैं कि छत्तीसगढ़ वाकई राम के सीधे-सच्चे  भक्तों का गढ़ है. सामाजिक समरसता पर आधारित रामनामी परम्परा छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक अलग पहचान दिलाती है.

 
                                                                   
          यह सचमुच  स्वागत योग्य है  कि राज्य की  पहचान के इस आकर्षक रंग को और भी चमकदार बनाने की दिशा में भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के फिल्म प्रभाग ने ५१ मिनट के एक वृत्त-चित्र का निर्माण किया है. फिल्म के निर्देशक हैं श्री सुनील शुक्ला , पट-कथा है श्री कमल तिवारी की . रामनामी समुदाय के अभ्युदय से लेकर वर्तमान में भी जारी उसकी  जीवन-यात्रा का वर्णन 'रामराम 'शीर्षक वाले इस फिल्म के प्रारंभ से आखिर तक दर्शकों को बाँध कर रखता है .इसमें अखिल भारतीय रामनामी महासभा के अध्यक्ष फिरत राम महिलांगे समेत इस समुदाय के अनेक सदस्यों के वक्तव्यों से उनके रीति-रिवाज और रहन-सहन की सटीक जानकारी मिलती है.  वृत्त चित्र में इतिहास और पुरातत्व विशेषज्ञ और हिन्दी ब्लॉग जगत में अपने 'सिंहावलोकन 'ब्लॉग के लिए चहुँ ओर चर्चित श्री राहुल सिंह और बिलासपुर के  वरिष्ठ पत्रकार श्री सतीश जायसवाल के वक्तव्यों से  भी  इस समुदाय की अनेकानेक विशेषताएं प्रकट होती हैं .  उस दिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर  में जारी शारदीय नवरात्रि के भक्तिमय माहौल में श्री  राहुल सिंह के निवास पर अचानक ही कुछ ब्लॉग-लेखक  मित्रों की बैठक हो गयी,जहां  नितांत घरेलू वातावरण में  यह डी.व्ही.डी . अनौपचारिक रूप से जारी कर दी गयी . कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष और बहु-प्रशंसित ब्लॉग 'ग्राम चौपाल ' के  श्री  अशोक बजाज  सहित  भिलाई नगर के  ब्लॉगर श्री  बी .एस.पाबला (जिंदगी के मेले ) और श्री संजीव तिवारी ( आरम्भ) ,अभनपुर के श्री ललित शर्मा (ललित डॉट कॉम )   और रायपुर के श्री जी.के.अवधिया (धान के देश में ) भी मौजूद थे . छत्तीसगढ़ी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता श्री अनुज शर्मा और इंदौर से छत्तीसगढ़ प्रवास पर आयीं ब्लॉग-लेखिका सुश्री अर्चना चावजी ने इस मौके पर अपनी पसंद के गीत सुनाकर वातावरण को और भी रोचक बना दिया . यह मेरा सौभाग्य था कि  ब्लॉगर मित्रों के आमंत्रण पर  इस बेहद सादगीपूर्ण घरेलू ब्लॉगर सम्मेलन  का मै भी साक्षी बना.  .
                                                                                                                   -  स्वराज्य करुण

                                                                                                             


5 comments:

  1. वाह ...रामजी से बहुत ही प्यारा रिश्ता जोड़ा है छत्तीसगढ़ के लोगों ने ,बहुत अच्छा लगा पढ़कर

    ReplyDelete
  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    ReplyDelete
  3. आपके लेख ने राम नाम से सराबोर कर दिया अब यह डीवीडी लेने आपके पास आना पड़ेगा

    ReplyDelete
  4. राममय तन,मन एवं जिव्हा। पूर्ण समर्पण की पराकाष्ठा

    ReplyDelete
  5. देर से पहुंचने के खेद सहित हार्दिक और सादर आभार.

    ReplyDelete