महान संत गुरुनानक देव की छत्तीसगढ़ यात्रा पर एक महत्वपूर्ण किताब
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(आलेख -स्वराज्य करुण )
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महान संत और सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी आज से लगभग 520 साल पहले छत्तीसगढ़ भी आए थे. वे भारत भ्रमण पर निकले थे और वर्ष 1506 ईस्वी में अमरकंटक से शिवरीनारायण होकर जगन्नाथपुरी जाते हुए छत्तीसगढ़ के ग्राम गढ़फुलझर भी आए थे. इस गाँव से लगे हुए तत्कालीन रानीसागर नामक गाँव में उनका दो दिवसीय पड़ाव था. गुरुनानक जी के आगमन की याद में रानी सागर का नामकरण 'नानक सागर' किया गया. गढ़फुलझर और उससे लगा हुआ नानक सागर वर्तमान महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना तहसील में हैं . यहाँ पर नानक सागर साहिब गुरुद्वारा भी है.दोनों ओड़िशा के सीमावर्ती गाँव हैं . गढ़फुलझर और नानक सागर आज पूरे देश के सिक्ख समाज की आस्था का प्रमुख केन्द्र बन गए हैं.गुरुनानक जी जगन्नाथ पुरी की यात्रा से वापसी में भी गढ़फुलझर आए थे. उन दिनों छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था. उन दिनों कहीं आने -जाने के लिए आज जैसे साधन नहीं थे. जरा सोचिए, उस दौर में गुरुनानक जी जैसी महान विभूतियाँ अपने प्रेरक विचारों को जन -जन तक पहुँचाने के लिए सैकड़ों, हज़ारों मील की यात्रा कैसे करती रही होंगी! गुरुनानक देव जी भी अपने अनुयायियों के साथ पंजाब से जगन्नाथ पुरी शायद पैदल जा रहे थे.
दिव्य धाम नानक सागर
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पूरी दुनिया को सत्य, अहिंसा, दया, करुणा और परोपकार जैसे सर्वश्रेष्ठ मानव मूल्यों का संदेश देने वाले गुरुनानक देव जी के छत्तीसगढ़ प्रवास से जुड़े कई ऐतिहासिक तथ्य हाल के कुछ वर्षों में सामने आए हैं. उनकी छत्तीसगढ़ यात्रा से जुड़े इस प्रकार के विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रसंगों पर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार, पिथौरा (जिला -महासमुंद )निवासी श्री शिवशंकर पटनायक ने 'दिव्य धाम नानक सागर ' शीर्षक से एक महत्वपूर्ण किताब लिखी है. श्री पटनायक से मिलने मैं उस दिन शाम को उनके घर गया था, जहाँ उनके हाथों मुझे उनकी इस मूल्यवान पुस्तक की सौजन्य प्रति प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त हुआ. उन्होंने प्रबुद्धजनों के विचारों को और उनके द्वारा रखे गए तथ्यों को संकलित और सम्पादित करते हुए अपने भी विचार इसमें शामिल किए हैं.
अब तक 38 किताबें प्रकाशित ; 39 वीं जल्द आएगी
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पौराणिक और सामाजिक विषयों पर श्री पटनायक की 37 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. यह उनकी 38वीं किताब है, जबकि भगवान श्री रामचंद्र जी के अनुज भरत पर भी उनकी एक पुस्तक जल्द आने वाली है. श्री पटनायक के पौराणिक उपन्यासों में माता कौशल्या पर 'कोशल नंदिनी' रावण की आत्मग्लानि पर 'अग्नि स्नान ', छत्तीसगढ़ के लोक देवता पर 'देवी करिया धुर्वा' , महाभारत के कर्ण पर 'कालजयी कर्ण ' और प्रश्नों की शर शैय्या पर भीष्म ' कहानी संग्रह 'पराजित पुरुष ', 'मंदिर सलामत है' आदि शामिल हैं.
उनके साहित्य पर अब तक चार पीएच-डी.
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श्री पटनायक के साहित्य पर शोधर्थियों द्वारा अब तक चार पीएच -डी. भी की जा चुकी है. ताजा शोध प्रबंध वर्ष 2026 में श्री बेनु प्रसाद सिदार ने लिखा है, जिसका विषय है 'शिवशंकर पटनायक के पौराणिक उपन्यासों के नारी -पात्रों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण. यह शोध कार्य पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के अंतर्गत किया गया है.
श्री शिवशंकर पटनायक द्वारा रचित पुस्तक 'दिव्य धाम नानक सागर 'के प्रकाशक पिथौरा निवासी वरिष्ठ पत्रकार श्री रजिन्दर सिंह खनूजा हैं. गुरुनानक देव जी की गढ़फुलझर यात्रा के विभिन्न ऐतिहासिक तथ्यों के खोजकर्ता टाटीबंध, रायपुर के श्री अमृत पाल सिंह (रिंकू ) ओबेरॉय हैं, जो नानक सागर रिसर्च टीम के प्रमुख भी हैं.उल्लेखनीय है .महासमुंद जिले का बसना -सरायपाली क्षेत्र राजवंशों के समय फुलझर राज के नाम से जाना जाता था. यह एक रियासत थी.लेखक श्री पटनायक ने इस पुस्तक की रचना करने से पहले पत्रकार श्री खनूजा के साथ स्वयं गढ़फुलझर और नानक सागर का अध्ययन दौरा किया था और स्थानीय लोगों से बातचीत करके कई तथ्य भी संकलित किए थे.
भैना राजवंश के शासन काल में छत्तीसगढ़ आए थे गुरुनानक जी
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वर्ष 2023 में प्रकाशित लगभग 150 पन्नों की सुन्दर छपाई और रंगीन चित्रों से सुसज्जित इस पुस्तक के लिए सहयोग राशि 151 रूपए रखी गई है. पुस्तक में गढ़फुलझर के भैना राजवंश की भी जानकारी मिलती है. भैना राजाओं के वंशज श्री राजा राम राजभानू (डिप्टी रजिस्ट्रार -फर्म्स एवं सोसायटीज )ने पुस्तक में 'प्रफ्फुलित मन ' शीर्षक अपने संदेश में लिखा है कि भैना राजा जगत साय ठाकुर के वंशज एवं फुलझर राज्य के संस्थापक राजा फूलसाय भैना ठाकुर ने गढ़ फुलझर राज की स्थापना की थी. उनकी 18पीढ़ियों ने यहाँ राज किया था.इनमें सभी धर्मानुरागी थे. श्री राजा राम राजभानू के अनुसार जब गढ़फुलझर के राजपाट की ज़िम्मेदारी मानस राज सागरचंद भैना को सौंपी गई, जो अत्यंत कुशल प्रशासक और धर्मशील थे, उनके ही राज काल में गुरुनानक देव जी का गढ़फुलझर आगमन हुआ, जहाँ रानी सागर (अब नानक सागर ) में दो दिन के पड़ाव में उन्होंने लोगों को अपना उपदेश दिया था. गढ़फुलझर के राजा मानस राज सागर चंद भैना ने गुरुनानक जी के नाम पर 5एकड़ ज़मीन भी दी थी.
छत्तीसगढ़ और पंजाब के बीच बना ऐतिहासिक रिश्ता
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मेरे विचार से इसे हम तत्कालीन छत्तीसगढ़ और पंजाब राज्य के बीच बना ऐतिहासिक आत्मीय रिश्ता भी कह सकते हैं. पुस्तक में 'गढ़फुलझर' शीर्षक एक अध्याय में श्री मनमोहन दास वैष्णव को संदर्भित करते हुए भैना राज्य के पूर्व शासक भानुमान का वैवाहिक संबंध चण्डीगढ़ राज्य उनका राजकुमारी चंदन कुमारी के साथ होने और इसके फलस्वरूप दोनों राज्यों में प्रगाढ़ मैत्री संबंध स्थापित होने की भी जानकारी दीं गई है. यह भी बताया गया है कि दोनों राज्यों के बीच बहुत दूरी होने के बावजूद प्रजा एक -दूसरे के राज्य में आना -जाना करती थी गुरुनानक जी के अनुयायियों और भक्तों का आगमन भी भैना काल में (गढ़फुलझर क्षेत्र में ) लगातार होता रहा, जिसका प्रभाव यहाँ भी पड़ा.श्रीमनमोहन वैष्णव के अनुसार समय अबाध गति से बढ़ रहा था, उसी क्रम में पंजाब और गढ़फुलझर के नागरिकों के मध्य संबंध भी बढ़ रहे थे. पंजाब से आए सिखों का मन भी यहाँ रमने लगा था. उन्होंने गढ़फुलझर राज्य में बस जाने का मन बना लिया और स्थायी रूप से रहने लगे. इतने लम्बे संबंधों के कारण स्थानीय रीति -रिवाज, बोली -भाषा, रहन -सहन और संस्कारों को उन्होंने कब स्वीकार कर लिया, यह उन्हें ज्ञात नहीं. इस प्रकार भक्तिकाल में गुरुनानक देव जी के भव्य व्यक्तित्व, वाणी, कीर्तन और उपदेशों का प्रचार -प्रसार भैना राज्य में व्यापक रूप से होने लगा पुस्तक में दिए गए तथ्यों के अनुसार गुरुनानक जी के आगमन पर स्थानीय ग्रामीणों ने उनका शानदार आत्मीय स्वागत किया था. इस जगह को स्थानीय लोग बावा डेरा भी कहते हैं.
*गुरुनानक जी से प्रभावित हुआ छत्तीसगढ़ का बंजारा समाज *
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छत्तीसगढ़ का बंजारा समाज भी गुरुनानक जी के उपदेशों को मानने वाला समाज है. पुस्तक से यह भी जानकारी मिलती है कि लगभग एक हजार बंजारा परिवार इस क्षेत्र के 40 गाँवों में रहते हैं.पुस्तक में नानक सागर रिसर्च टीम के प्रमुख अमृत पाल सिंह (रिंकू )ने बंजारा समाज के प्रतिनिधियों से हुई चर्चा का भी उल्लेख किया है. उनके हवाले से उन्होंने लिखा है कि बंजारा समाज के पूर्वजों द्वारा गुरुनानक देव जी के नाम से शिवरीनारायण में करीब 5जगहों पर 9 एकड़ जमीन दी गई थी, जो आज भी मौज़ूद है. शिवरीनारायण में और गढ़फुलझर के पास ग्राम लिलेश्वर और जेवरा में गुरुनानक जी का मंदिर है जहाँ मूर्ति भी विराजमान है, जिनकी पूजा वहाँ के स्थानीय बंजारों द्वारा की जाती है. जेवरा में भी गुरुनानक देव जी के नाम 12एकड़ ज़मीन मौज़ूद है. बंजारा समाज के लोगों ने अमृतपाल सिंह को बताया कि वहाँ पर भी समाज ने एक छोटा गुरुद्वारा साहिब का निर्माण किया है.पुस्तक 'दिव्य धाम नानक सागर ' में अन्य विशिष्टजनों के साथ बंजारा समाज महासभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री गुहाराम बंजारा का भी शुभकामना संदेश प्रकाशित किया गया है.उनके अलावा छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, बसना के विधायक श्री सम्पत अग्रवाल, दिल्ली के गुरु सेवक सरदार देवेंदर सिंह,गुरुद्वारा धन धन बाबा बुड्ढा साहिब, तेलीबाँधा रायपुर के प्रधान सरदार हरकिशन सिंह राजपूत, साप्ताहिक 'छत्तीसगढ़ जनादेश ' महासमुंद के प्रधान सम्पादक श्री के. पी. साहू, और हम चाकर गोविन्द के, गतका अखाड़ा कमेटी दुर्ग के अध्यक्ष सरदार हरविंदर सिंह के भी शुभेच्छा संदेश इसमें प्रकाशित किए गए हैं. खोजकर्ता के रूप में अमृतपाल सिंह (रिंकू )ने भी अपनी बात रखी है.
कई ऐतिहासिक चित्र भी हैं किताब में
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पुस्तक में गुरुनानक जी के छत्तीसगढ़ प्रवास से जुड़े कई यादगार चित्र भी दिए गए हैं. इनमें गढ़ फुलझर के प्राचीन किले,गुरुद्वारा नानक सागर साहिब, गढ़फुलझर, मानसरोवर तालाब, भैना राजा के किले और मंदिर, रानी के किले, रानी तालाब,ग्राम नानक सागर में स्थित नानक चबूतरा,बंजारा समाज द्वारा पिथौरा से 31किलोमीटर दूर ग्राम लिलेसर में और ग्राम दाबपाली (बागबाहरा) में निर्मित गुरुनानक जी के मंदिर के फोटोग्राफ़्स भी शामिल हैं. इनके अलावा पिथौरा से लगभग 77किलोमीटर की दूरी पर शिवरी नारायण में भी बंजारा समाज ने गुरुनानक जी का मंदिर बनवाया था. उसका फोटो भी पुस्तक में दिया गया है. नानक सागर में सिक्ख समाज ने एक भव्य गुरूद्वारे का निर्माण भी 15 मार्च 2026 से शुरू किया गया है.पुस्तक में गुरुनानक जी से जुड़ी 10 प्रेरक घटनाओं की भी जानकारी दी गई है.
प्रेरणा का प्रकाश पुंज है 'दिव्य धाम नानक सागर '
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आज जबकि पूरी दुनिया में जगह -जगह युद्ध, हिंसा और प्रतिहिंसा का भयावह वातावरण है, अराजक तत्वों द्वारा मानव समाज को नफ़रत की आग में झुलसाया जा रहा है, तब विश्व -शांति, मैत्री और सामाजिक सदभावना के लिए गुरुनानक देव जैसे पवित्र संत -महात्माओं के विचारों से ही मनुष्य को शांतिपूर्ण जीवन जीने का रास्ता मिल सकता है. इस दृष्टि से देखें तो 'दिव्य धाम नानक सागर ' जैसी पुस्तक निराशा के अंधकार में भटकते मनुष्यों को सच्चाई और अच्छाई की राह दिखाने वाले प्रेरणा के प्रकाश पुंज की तरह बहुत उपयोगी साबित हो सकती है.
-स्वराज्य करुण



