Thursday, March 5, 2026

(कविता ) यह कोई देशभक्ति नहीं / कवि -स्वराज्य करुण

 यह कोई देशभक्ति नहीं 

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( स्वराज करुण )

हम और आप मनाते रहे 

रंगों का त्यौहार होली 

और उधर कोई ख़ून की होली 

खेल कर उजाड़ता रहा 

हम जैसे करोड़ों लोगों की 

रंग -बिरंगी ज़िन्दगी.

हमसे बहुत दूर उस देश की

धरती पर सिसकती रही मानवता 

बिलखती रही माताएँ,

बिलखती रही बहनें,

बिलखते रहे पिता.

जलते रहे मकान,

जलती रही बस्तियाँ. 

युद्ध ने उजाड़ा करोड़ों लोगों 

का जीवन. 

इसलिए तो कह रहा हूँ,

किसी दूसरे देश पर जबरन 

हमला कोई देशभक्ति नहीं है,

मानवता के खिलाफ़ अपराध है.

इसीलिए तो कह रहा हूँ...

हो सके तो 

इतना ज़रूर करना, 

उन परमाणु बमों को 

नष्ट कर देना, जिनसे 

हमारी इस हरी -भरी 

धरती और उस पर 

रंग -बिरंगे फूलों की तरह 

खिलते जन -जीवन के 

हमेशा के लिए नष्ट हो 

जाने का खतरा है, 

नष्ट हो भी रहा है.

हो सके तो रोक लेना 

उस  बेरहम युद्ध को, जो 

स्कूलों और अस्पतालों पर 

बम बरसा रहा है.

हो सके तो याद कर लेना 

ईरान की उन 165 नन्हीं बेटियों को 

जो गईं थीं स्कूल 

कुछ सीखने और अपनी 

ज़िन्दगी संवारने का 

सपना लिए, लेकिन

फिर कभी घर नहीं लौट पाईं 

अपने सपनों के साथ. 

उनके स्कूल पर हुआ हमला 

उनके मासूम सपनों पर आक्रमण था.

नष्ट कर देना इंसानियत के दुश्मन 

उन घातक बमों को,

जिनसे फिर न झुलसे कोई 

हिरोशिमा और कोई नागासाकी,

घायल न हों किसी बच्चे के,

किसी बेटी के फूलों जैसे कोमल सपने.

हो सके तो 

नष्ट कर देना उन वैक्यूम बमों को 

जिनसे भाप बनाकर

उड़ा दिए गए गज़ा पट्टी 

के हजारों इंसान.

नष्ट कर देना उन 

निर्मम हृदयों के पथरीले 

इरादों को, जिन्होंने 

इंसानियत के खिलाफ़ युद्ध में उजाड़ा 

इराक, अफगानिस्तान,

सीरिया और फिलिस्तीन सहित 

और भी कई देशों को, 

तबाह कर दी

वहाँ के लोगों की ज़िन्दगी.

हो सके तो नष्ट कर देना 

उन प्रयोग शालाओं को 

जहाँ बनते हैं मानवता को 

मटियामेट करने के इरादे से 

ऐसे घातक हथियार,

बनती हैं  दरिंदगी करने वाली 

मिसाइलें,

हो सके तो नष्ट 

कर देना  उन बेरहम दिमागों को,

जिनमें जन्म लेते हैं 

पृथ्वी को नष्ट करने के 

विनाशकारी इरादे, 

जिनमें पैदा होते हैं 

ऐसे घातक हथियार बनाने के विचार 

हो सके तो 

नष्ट कर देना उन हाथों को 

जो बनाते हैं मानवता के खिलाफ़ 

ऐसे हथियार.

इन सबके नष्ट होने पर ही 

बची रहेगी हमारी धरती,

बचे रहेंगे हम और तुम 

और हमारे जैसे 

करोड़ों -अरबों इंसान

एक खुशनुमा ज़िन्दगी के लिए.

     -स्वराज्य करुण


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