Saturday, March 7, 2026

(आलेख ) श्री राम चरित मानस के 'अरण्य काण्ड ' और 'सुन्दर काण्ड 'का हुआ उड़िया अनुवाद /लेखक -स्वराज्य करुण )

 

छत्तीसगढ़ के बाबा विष्णु शरण 65 साल पहले 

कर चुके थे  उड़िया भाषा में सम्पूर्ण 'मानस 'का अनुवाद 

           (आलेख  -स्वराज्य करुण )

गोस्वामी तुलसीदास के अवधी में रचित महाकाव्य श्रीरामचरित मानस की लोकप्रियता बहुत दूर तक फैली हुई है. छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय बाबा विष्णु शरण ने इस महाकाव्य के तृतीय सोपान 'अरण्य काण्ड ' और पंचम सोपान 'सुन्दर काण्ड ' का ओड़िया भाषा में अनुवाद किया था, जो उनके निधन के लगभग 37 साल बाद वर्ष 2024 में प्रकाशित हुआ. दोनों अनुवाद देवनागरी लिपि में छपे हैं. वैसे तो बाबा विष्णु शरण ने आज से 65 साल पहले वर्ष 1961में श्री रामचरित मानस का उड़िया में शाब्दिक अनुवाद कर लिया था, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण प्रकाशन संभव नहीं हो पा रहा था.

                              

               


इसमें से इन दो सोपानों को बसना (जिला -महासमुन्द )स्थित मानव मंगल संस्थान ने प्रकाशित किया है.बाबा के प्रमुख शिष्य और संस्थान के अध्यक्ष नारायण प्रसाद नैरोजी ने दोनों पुस्तकों में 'दो शब्द ' शीर्षक अपने वक्तव्य में लिखा है कि बसना क्षेत्र से बाबा (विष्णु शरण जी )का विशेष लगाव रहा, बाबा ने इस क्षेत्र की उड़िया भाषा भाषी जनता को श्रीमद गोस्वामी तुलसीदास विरचित रामचरित मानस के जीवन दर्शन, भक्ति और ज्ञान से लाभान्वित करने के लिए उड़िया भाषा में सन 1961में उसका शब्दशःछन्दबद्ध अनुवाद किया था, जिसे प्रकाशित कर आम जनता में वितरित करनाचाहते थे.परन्तु अर्थाभाव के कारण यह संभव नहीं हो सका. अब उनकी स्मृति में स्थापित मानव मंगल संस्थान, बसना द्वारा छत्तीसगढ़ सर्व उड़िया समाज के अध्यक्ष एवं रायपुर उत्तर के विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा जी के सौजन्य से सिर्फ़ ' सुन्दर काण्ड ' का प्रकाशन किया जा रहा है. हमें विश्वास है कि उड़िया भाषा भाषी भक्तगण इसे गाकर, पाठ कर हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त कर सकेंगे. इसी कड़ी में 'अरण्य काण्ड' में ' दो शब्द 'शीर्षक अपने वक्तव्य में श्री नैरोजी ने लिखा है कि डॉ. संध्या राजेन्द्र राघवेन्द्र भोई, सरायपाली तथा नैरोजी परिवार, देवरी (पिलवापाली )एवं गणेशपुर के सौजन्य से सिर्फ़ 'अरण्य काण्ड ' का प्रकाशन किया जा रहा है. हमें विश्वास है कि उड़िया भाषा भाषी भक्तगण इसे गाकर, पाठकर भक्ति पथ पर अग्रसर होंगे.

         

                                                     



                                     *कवि, लेखक और पत्रकार भी रहे विष्णु शरण*

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      उल्लेखनीय है कि बाबा विष्णु शरण छत्तीसगढ़ के धीर -गंभीर सर्वोदयी विचारक,अध्यापक, वरिष्ठ कवि,लेखक और पत्रकार थे. उनका जन्म बसना क्षेत्र के ग्राम पझरापाली में 19 सितम्बर 1919 को हुआ था. अपनी 69 वर्षीय जीवन यात्रा को अपने साधना कुटीर बसना में 7नवम्बर 1988 को पूर्ण विराम देकर वे ब्रम्हलीन हो गए .  उनके हिन्दी कविता संग्रहों में वर्ष 1986 में प्रकाशित 'पंचविंशिका', वर्ष 1988में प्रकाशित 'युगे -युगे ' और ' प्राणाधिके' शामिल है. इन तीनों संग्रहों के प्रकाशक श्री गोपेश्वर प्रसाद नैरोजी हैं.बाबा विष्णु शरण के देहावसान के कुछ महीनों बाद मई 1989 में 'यमुना तीरे 'का प्रकाशन हुआ, जबकि 35 साल बाद वर्ष 2023 में उनका एक और हिन्दी कविता -संग्रह 'धीर -समीरे ' वैभव प्रकाशन, रायपुर द्वारा प्रकाशित किया गया.बाबा जी के गहन दार्शनिक और आध्यात्मिक आलेखों के संकलन 'ज्ञान गंगा ' का प्रकाशन  उनके निधन के करीब 5साल बाद सितम्बर 1993 में मानव मंगल साधना संस्थान, बसना द्वारा किया गया. इसमें प्रकाशित जीवन परिचय में उनके शिष्य नारायण प्रसाद नैरोजी ने बताया  है कि बाबा विष्णु शरण वैष्णव वंशी थे. उनके पिता भरत दास उड़िया भाषा के कुशल कवि और हिन्दी साहित्य के विदग्ध मर्मज्ञ थे. अनुताप तरंग, गौर संकीर्तन, मंगलास्तव, संबलेश्वरी जणाण, कृष्ण -सुदामा पांडवंकर भातृ -प्रेम आदि उड़िया में इनकी जन -प्रिय पुस्तकें हैं. 

      हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से साहित्य रत्न की उपाधि प्राप्त बाबा विष्णु शरण रायपुर के शासकीय नार्मल स्कूल में अध्यापक भी रहे. उन्हें   महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा योजना का रायपुर जिला संयोजक भी बनाया गया था. अध्यापन कार्य के प्रशिक्षण के लिए वे गांधीजी के सेवाग्राम वर्धा में भी रहे, जहाँ महात्मा गांधी के जीवन -दर्शन का उन पर गहरा असर हुआ. सेवाग्राम में उन्हें महात्मा गांधी सहित दादा कृपलानी, आर्य नायकम, कुमारप्पा आदि कई विद्वानों का भी सानिध्य मिला. 

         बाबा विष्णु शरण ने रायपुर में वर्ष 1950 में  ठाकुर प्यारेलाल सिंह  के अर्ध -साप्ताहिक 'राष्ट्रबन्धु' में सहयोगी सम्पादक के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी अहम भूमिका निभाई. वर्ष 1959 -60 में बाबा विष्णु शरण को रायपुर जिला सर्वोदय मंडल का जिला संयोजक बनाया गया. इस महत्वपूर्ण दायित्व का भी उन्होंने बखूबी निर्वहन किया. उनकी लोकप्रियता सिर्फ़ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं थी, बल्कि मध्यप्रदेश के इंदौर, उज्जैन और सोनकच्छ तक उनकी प्रसिद्धि का विस्तार हुआ.उनके कविता -संग्रहों 'प्राणाधि के ' और 'युगे -युगे ' का लोकार्पण 21 मई 1988 को इंदौर में हुआ. लोकार्पण समारोह विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के हिन्दी विभाग और हिन्दी साहित्य समिति इंदौर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था.बाबाजी अपने शिष्यों के आग्रह पर 29 नवम्बर 1986 से 16 जनवरी 1987 तक इंदौर प्रवास पर थे. इस दौरान उनके प्रथम कविता -संग्रह 'पंचविंशिका'का लोकार्पण हिन्दी विभाग,विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के सौजन्य से सम्पन्न हुआ.

   छत्तीसगढ़ का बसना उनका कार्यक्षेत्र रहा.  वे बसना के अपने 'साधना कुटीर ' में  आम जनता की समस्याओं को सुनकर उन्हें हल करने के लिए मार्ग दर्शन देते हुए मददगार की भूमिका में भी रहते थे. उनका साहित्य सृजन भी इसी 'साधना कुटीर ' में चलता रहता था, जो आज भी उनके चाहने वालों के लिए आस्था का प्रमुख केन्द्र बना हुआ है.

      -स्वराज करुण


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