Friday 29 April 2011

अच्छा कौन- अनपढ़ इंसान या पढ़ा-लिखा हैवान ?

                                                                                                        -- स्वराज्य करुण
     कहते हैं -शिक्षा मनुष्य को दया ,करुणा , प्रेम और सदभावना जैसे सर्वश्रेठ मानवीय गुणों से सुसज्जित  एक सम्पूर्ण  मानव के रूप में विकसित करती है. दुनिया में मानव-सभ्यता की विकास -प्रक्रिया में कई ऐसी महान विभूतियों का आगमन हुआ ,जिन्होंने अपने समय के समाज को अपने जीवन और कार्यों के जरिये मानवता की शिक्षा देकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सच्चा मानव बनने की प्रेरणा दी. भारत में गौतम बुद्ध , महावीर स्वामी , गुरु नानक देव , संत कबीर , गोस्वामी तुलसीदास, महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों की एक लंबी श्रृंखला है, जो अपने-अपने युग में  इन मानवीय मूल्यों  की अनमोल धरोहर  के साथ दुनिया को इंसानियत का सन्देश देते रहे .
      भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर देखें तो यीशु मसीह और हज़रत मोहम्मद ने भी समाज को नेकी के रास्ते पर चलने की सीख दी. दुनिया भर के स्कूल-कॉलेजों में  भावी पीढ़ी को  इन सभी महान आत्माओं के प्रेरक विचारों की शिक्षा भी अन्य विषयों के साथ दी जाती है ,ताकि विश्व में अमन -चैन का वातावरण बने , लोग इंसान होने के नाते इंसानियत की राह पर चलें.इनमें से अधिकाँश महान लोगों ने किसी स्कूल-कॉलेज की पढ़ाईं नहीं की .लेकिन उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन को इंसान के लिए एक खुली किताब के रूप में समाज के सामने रख दिया . उन्होंने अपने जीवन से लोगों को शिक्षित करने की कोशिश की . इन महान शख्सियतों को यह विश्वास था कि हर आने वाला कल आज से बेहतर होगा , लेकिन आज के हालात को देख कर दिल में यह सवाल बार-बार उठता है कि   हमारी दुनिया क्या वाकई  अच्छे और सच्चे मानवीय गुणों पर आधारित  एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रही है ?
     अगर हम 'मानव -सभ्यता'  जैसे शब्द-युग्म का इस्तेमाल करते हैं ,तो  आज के परिवेश को देख कर क्या ऐसा नहीं लगता कि सभ्यता शब्द का मानव जीवन से दूर -दूर तक कोई रिश्ता नहीं है ? यह मानव-सभ्यता नहीं,बल्कि मानव की असभ्यता है ,कहें तो गलत नहीं होगा .यह भी सच है कि जो वास्तव में मानव है ,वह असभ्य नहीं हो सकता .  सभ्यता तो इंसान को पारिवारिक ,सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन की  तहजीब सीखाती है,लेकिन ये अजीब  बात है कि हजारों महान विभूतियों की हजारों-हजार कोशिशों के बावजूद आज का इंसान तहजीब नहीं सीख पाया .वह जैसे-जैसे साक्षर और डिग्रीधारी शिक्षित कहलाने लगा है, वैसे-वैसे उसमें सत्य के स्थान पर  असत्य , अहिंसा के बजाय हिंसा और सदाचार के स्थान पर भ्रष्टाचार जैसे दुर्गुण तेजी से बढ़ रहे हैं,जबकि साफ़ दिखता है कि  निरक्षर इंसान इन दुर्गुणों से कोसों दूर रहता है. मैंने तो आज तक किसी निरक्षर को न तो  घूस लेते  देखा और न ही सुना !
         नकली दवाई ,नकली मिठाई, नकली दूध , नकली खाद  और नकली बीज कौन बनाता और बेचता है ?  मिर्च-मसालों और  मिठाइयों में  जीवन के लिए घातक रसायनों की मिलावट कौन करता है ? बाज़ारों में ज़हरीले रंगों से रंगी सब्जियां कौन बिकवाता  है  ? हजारों -लाखों की फर्जी प्रसार संख्या और दर्शक संख्या बताकर अदृश्य अखबारों , कथित खबरिया चैनलों और फर्जी वेबसाईटों के नाम पर सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं से विज्ञापन लेकर  करोड़ों रूपए की उगाही करने वाले बेशर्म  भी काफी शातिर किस्म के साक्षर लोग ही तो हैं .क्या कोई निरक्षर ऐसा अपराध कर सकता है ?   जमाखोरी ,मुनाफाखोरी और कालाबाजारी कर जनता   को महंगाई की आग में झोंकने वाले लोग भी न सिर्फ साक्षर होते हैं , बल्कि ऐसी निर्लज्ज गणितबाजी में काफी होशियार भी होते हैं ! समाज-सेवी संगठन बना कर कुछ  लोग देश में  हर साल कई करोड़ रूपए का  सरकारी अनुदान डकार जाते हैं . कोई  निरक्षर तो ऐसा नहीं करता !
         हाल ही में विभिन्न ताकतवर देशों के भ्रष्टाचार को उजागर कर चुके   'विकिलिक्स '     के संस्थापक और संचालक जूलियन असांजे ने एक भारतीय टेलीविजन समाचार चैनल को विशेष भेंटवार्ता में बताया कि विदेशी बैंकों में सबसे ज्यादा काला धन भारत से आ रहा है और स्विस-बैंक में सबसे अधिक गुप्त खाते भारतीयों के हैं . यह देख-सुन कर लगता है कि सौ साल से भी ज्यादा समय तक भारत को लूटने -खसोटने के बाद अंग्रेज तो चले गए ,लेकिन अब भारतीय नागरिक ही भारत को बुरी तरह लूट रहे हैं . ये लुटेरे भी अनपढ़ नहीं हैं और इनको  अपने ही देश की दौलत पर डाका डालने में ज़रा भी लाज-शरम या संकोच नहीं है  !
               बेईमानी के इस युग में  हमारे महान देश के हर सरकारी दफ्तर में सेवा भावना से  काम करने वाले मेहनती कर्मचारियों और अधिकारियों संख्या हालांकि बहुत कम है ,लेकिन उन कर्त्तव्य परायण लोगों को पीछे धकियाकर निकम्मे और भ्रष्ट लोग ही पदोन्नति की दौड़ में सबसे आगे होकर कामयाब हो जाते हैं.   ये बेईमान अफसर -कर्मचारी भी अनपढ़ नहीं होते .   एक दैनिक की सुर्ख़ियों में छपा है कि भारतीय नागरिक-विमानन मंत्रालय    के एक आला अफसर की बेटी ने देश के एक बड़े शहर के विमानतल में संचालित एक फर्जी   उड़ान प्रशिक्षण केन्द्र से विमान पायलट का फर्जी प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र हासिल कर लिया ! इसके कुछ दिनों पहले भी अनेक फर्जी प्रमाण-पत्र धारक विमान पायलटों के फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हो चुका है ! यह सोच कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि ऐसे फर्जी पायलट अगर हवाई जहाज उडाएं तो आसमान में कभी भी कितने भयानक विमान हादसे हो सकते हैं !   ज़ाहिर है - इस प्रकार के समाज-विरोधी अपराध किसी निरक्षर के द्वारा नहीं हो  रहे है !
    स्कूल-कॉलेजों में अध्यापन -कार्य के अपने दायित्व को छोड़ कर बच्चों को ट्यूशन और कोचिंग कक्षाओं में जाने को मजबूर करने वाले शिक्षक और प्रोफ़ेसर क्या निरक्षर होते हैं ? भू-माफिया , शराब माफिया ,ड्रग-माफिया ,तेल-माफिया ,खेल-माफिया , जंगल-माफिया और कोल-माफिया की तरह शिक्षा -माफिया भी समाज में बड़ी शान से फल-फूल रहे हैं . ये माफिया गिरोह भी तो अनपढ़ नहीं होते. उत्तर-दक्षिण ,पूरब-पश्चिम ,हर तरफ निजी क्षेत्र में  शॉपिंग -मॉलों  की तरह शिक्षा की दुकानें ऊपरी चमक-दमक के साथ जनता को भ्रमित कर रही हैं . शिक्षा के दुकानदार क्या कभी  निरक्षर माने जाएंगे ? बमों और बंदूकों से समाज में ह्त्या और हिंसा के ज़रिये दहशत फैलाने वाले हर तरह के आतंकी भी अनपढ़ नहीं होते . उनमें से कई तो काफी उच्च डिग्री धारक भी होते हैं ,लेकिन निर्दोष इंसानों के खून से रंगे उनके हाथों को देख कर उनके शिक्षित होने पर संदेह उत्पन्न होता है ! नकली  नोटों के चालबाज सौदागरों को क्या निरक्षर माना जाएगा ?बड़े परदे और छोटे परदे  में  फूहड़ नाच-गानों के  घटिया दृश्यों  और बेहूदे सम्वादों के माध्यम से समाज  को नैतिक पतन के नर्क में ढकेल रहे फिल्म वालों को क्या हम निरक्षर मानेंगे ? गाँवों और  पेड़ों को उजाड़ कर अपनी फैक्टरियों के धुंए से हवा में जानलेवा प्रदूषण फैलाने और पर्यावरण को नष्ट करने वाले लोगों  को भला कौन मानेगा कि अनपढ़ है ?
           देश और दुनिया में   धर्म और जाति के नाम पर तमाम तरह के झगडे-फसाद निरक्षरों के द्वारा नहीं किए जा रहे हैं. क़ानून बनाकर उसे तोड़ने वाले व्यक्ति भी निरक्षर नहीं होते , बल्कि शातिर किस्म के तानाशाह अपने -अपने अवैध  कब्ज़े वाले मुल्कों में अपनी सुविधा के हिसाब से क़ानून बनाते या बनवाते हैं . ये तानाशाह भी  बहुत पढ़े-लिखे होते हैं  लोकतंत्र के इस दौर में जनता को बहला-फुसलाकर हुकूमत  हासिल करने और सार्वजनिक खजाने को लूटकर अपना घर भरने वाले लोग भी  उच्च शिक्षा प्राप्त  होते हैं. लोकशाही के इस  लूटतंत्र में नौकरशाही की अहम भूमिका होती है. सभी जानते हैं कि नौकरशाही में तमाम बड़े -बड़े अफसर उच्च शिक्षा प्राप्त लोग होते हैं . लायसेंस परमिट , ठेका जैसे मामलों में इन पढ़े-लिखे साहबों का क्या और कैसा रोल होता है , इसे भी हम और आप देख रहे हैं. अदालतों में गुनहगारों  को बेगुनाह और बेगुनाहों को गुनहगार साबित करने की कोशिश में सच और झूठ की सौदेबाजी करते काले कोट वाले भी कोई अनपढ़ या अंगूठा छाप नहीं होते , बल्कि इनसे तो अच्छा वो अंगूठा छाप है , जो   ऐसी घटिया हरकत  कभी नहीं करता .
       अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों  की जिंदगी का मोल-भाव करने और ऑपरेशन टेबल पर किसी गंभीर मरीज के प्राणों का सौदा करने वाले भी चिकित्सा-विज्ञान की उच्च डिग्रियों से सुसज्जित लोग ही तो होते हैं. क्या किसी  अनपढ़ को ऐसा अमानवीय कृत्य करते देखा है किसी ने ? सरकारी अस्पतालों में ऊंची तनख्वाहों में तैनात डॉक्टर मरीजों का इलाज वहाँ नहीं करते ,बल्कि उन्हें अपने घर बुलाकर या नहीं तो अपने अवैध  रूप से अनुबंधित निजी अस्पतालों में भेजकर मनमाने ढंग से उगाही करते हैं और उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हैं ! ऐसे धन-पिशाच डॉक्टर भी क्या कभी  निरक्षर हुआ करते हैं ?  देश-विदेश में हो रहे बड़े-बड़े घोटाले और भयानक आर्थिक अपराध साक्षर और कथित रूप से शिक्षित लोगों के द्वारा ही किए जा रहे हैं  ! फिर उनके पढ़े-लिखे होने का भला क्या मतलब रह जाता है ?  कई पढ़े-लिखे शासक ही तो हैं ,जिनकी मानवीय संवेदनाएं खत्म हो चुकी होती हैं और जो एक-दूसरे के देशों पर युद्ध थोपने की फिराक में रहते हैं और ऐसा कोई मौक़ा छोड़ना भी नहीं चाहते .फिर भले ही उसमें लाखों बेगुनाहों को बेमौत क्यों न मरना पड़े ! 
          दुनिया के हजारों-लाखों बरस के इतिहास में  समय के हिसाब से सोचें ,तो पचास-साठ या सौ साल भला क्या मायने रखते हैं ? अगर इस दौरान भी इंसान सत्य और अहिंसा जैसी कुछ अनमोल तहजीबें  सीख चुका होता ,तो शायद बीते  एक सौ बरस के छोटे से काल-खंड में दो-दो विश्व-युद्ध नहीं हुए होते ,कुवैत , अफगानिस्तान , इराक , श्रीलंका और लीबिया में क़त्ल-ए -आम नहीं हुआ होता , हाइड्रोजन बम, अणु बम ,परमाणु बम और रासायनिक बम का आविष्कार नहीं हुआ होता . हिरोशिमा और नागासाकी में अणु-बम नहीं गिराए जाते . आधुनिक मानव के असभ्य होने का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है कि युद्ध के उन्माद में उसने ऐसी घटिया हरकतों से  लाखों-लाख निरपराधों  को   मौत के घाट उतार दिया .  . अगर महान विभूतियों के विचारों और धर्म-ग्रंथों की शिक्षाओं से इंसान सबक लेता , तो शायद दुनिया में जर्मनी के हिटलर जैसे  युद्धखोर और युगांडा के इदी अमीन जैसे  आदमखोर शासक पैदा ही नहीं हुए होते !  यह सिलसिला तो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में किसी न किसी रूप में आज भी चल रहा है .
      इस बारे में आगे ज्यादा कुछ न कहते हुए मैं यहाँ कुछ  ऐसे ह्रदय-विदारक समाचारों का उल्लेख  कर रहा हूँ ,जिन्हें देख-पढ़ कर शायद आपका दिल भी सिहर उठे और यह सोचने के लिए मजबूर हो जाए कि पढ़े-लिखे लोग कितने ज़ालिम ,कितने बेरहम और कितने बेशर्म होते हैं कि वे अपने जैसे इंसानों पर इस तरह का शर्मनाक ज़ुल्म ढाते हैं ! इन समाचारों से लगता है कि आज के इंसानों की इन काली करतूतों से  इंसानियत शर्मिन्दा है और हैवानियत उनके सर चढ़ कर नाच रही है !
    पहली खबर वाशिंगटन से है, जहां विकीलिक्स ने गोपनीय दस्तावेजों से यह रहस्य उजागर किया है कि अमेरिका ने बिना किसी ठोस प्रमाण के .कई बरसों तक गुआंतानामो की जेल में सैकड़ों बेगुनाहों को कैद कर रखा है. उन पर जेल में हो रहे अत्याचारों के फोटो भी इस खबर के साथ अखबारों में छपे हैं, जिनमे एक कैदी को नंगा करके उस पर खूंखार शिकारी कुत्ते को हमले के लिए उकसाया जा रहा है और कैदी डर के मारे काँप रहा है.   दूसरे चित्र में एक अन्य कैदी को बेल्ट या जंजीर से बाँध कर फर्श पर किसी मरे हुए जानवर की तरह घसीटा जा रहा है !  दूसरा समाचार संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के हवाले से छपा  है,जिसमे बताया गया है कि श्रीलंका में साल २००९ में तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे और श्रीलंका सरकार के बीच हुए संघर्ष में भारी संख्या में निर्दोष नागरिक मारे गए .अस्पतालों पर भी बमबारी की गयी . इस खबर के साथ बेगुनाह नागरिकों की लाशों की तस्वीर भी प्रकाशित की गयी है ,जिसे देखकर मन विचलित हो जाता है.
        हमारे अपने देश भारत की एक खबर पढ़ कर भी दिल दहल उठता है,जहां केरल राज्य के कोलम जिले के एक सरकारी अस्पताल में १६ अप्रैल से १९ अप्रैल के बीच सिर्फ चार दिन में सोलह गर्भवती महिलाओं के समय से पहले प्रसव के लिए ज़बरदस्ती सिजेरियन ऑपरेशन इसलिए कर दिए गए ,क्योंकि अस्पताल की निश्चेतना विशेषज्ञ को दस दिनों की छुट्टी पर जाना था. इस घटना से कुछ ही दिनों पहले केरल के ही चेरथला के सरकारी अस्पताल में स्त्री-रोग विशेषज्ञ ने  ईस्टर की छुट्टी पर जाने की  ज़ल्दबाजी में केवल दो दिन में इक्कीस गर्भवती महिलाओं का ज़बरन सिजेरियन कर डाला . दोनों घटनाओं में पीड़ित महिलाओं की इन अस्पतालों में  जो दुर्गति हुई, उसकी एक अलग शर्मनाक कहानी है. देश के एक नए राज्य में  दवाई दुकानों को लायसेंस जारी करने और उनके निरीक्षण की जिम्मेदारी जिस अधिकारी को सौंपी गयी थी .वह  डिप्टी ड्रग-कंट्रोलर ही गद्दार निकला ,उसके घर से करीब-करीब साढ़े तीन करोड़ रूपए की अनुपातहीन संपत्ति सरकारी जांच में बरामद की गयी , जो उसने मेडिकल स्टोरों से घूस और अन्य अवैध तरीकों से हासिल की थी . जाहिर है कि ऐसे समाज विरोधी और देशद्रोही अधिकारियों की वजह से ही आज देश भर में नकली दवाओं का कारोबार आसानी से फल-फूल रहा है. ऐसे बेईमान अफसर क्या कभी निरक्षर पाए गए हैं ?भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ जन-जागरण के लिए सत्याग्रह अभियान चला रहे सहज-सरल समाज-सेवक अन्ना हजारे और योग गुरु रामदेव  के खिलाफ देश के तमाम पढ़े-लिखे भ्रष्टाचारी धन-पशु किस बेशर्मी से कीचड उछाल रहे हैं , यह तो हम और आप हैरान हो कर देख  ही रहे है ! ये उच्च शिक्षित हैवान अब अपनी बेशर्म हैवानियत की सारी हदें पार करने लगे हैं !
                     देश-दुनिया और समाज को  बेरहमी से लूटते ये  सारे सफेदपोश अपराधी निश्चित रूप से साक्षर और कथित रूप से काफी उच्च शिक्षित लोग हैं,  जिन्होने मानवता को कलंकित करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा है ! अब आप ही अपने दिल की गहराइयों से महसूस करें और  फैसला दें कि आज की दुनिया में सीधे-सादे अनपढ़ इंसान  अच्छे हैं ,या पढ़े-लिखे हैवान ?   वैसे मै तो आज के हालात को देखकर कभी-कभी मजबूर होकर यह सोचने लगता हूँ   कि देश और दुनिया में ज्ञान का मंदिर कहे जाने वाले  स्कूल-कॉलेजों को अगले कुछ दशकों के लिए बंद कर देना चाहिए ,ताकि  साक्षर और शिक्षित बेईमानों की संख्या कम हो और सीधे सच्चे अनपढों की संख्या में इजाफा !  शायद तभी समाज में सुख-शान्ति का वातावरण बनेगा !                                                                                                                                 -  स्वराज्य करुण

3 comments:

  1. पढे-लिखे लोग अपनी शिक्षा का अधिक दुरुपयोग समाज के शोषण में करते दिखाई देते हैं ।

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  2. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (30.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  3. जिसके जी मे जो आये वो करो भाई कि भारत तो अब मरने ही वाला है ईडिया के नये अवतार मे आने के लिये

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