वाकई यह एक शानदार और यादगार आयोजन था. साहित्य, कला और संस्कृति के तीन दिवसीय आयोजन *रायपुर साहित्य उत्सव 2026* के प्रथम दिवस पर मुझे भी अपनी कविता पढ़ने का अवसर मिला. नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित साहित्य उत्सव में छत्तीसगढ़ के दिवंगत वरिष्ठ साहित्यकारों की स्मृति में अलग -अलग मंडप बनाए गए थे. इनमें से सुरजीत नवदीप स्मृति मंडप में पहले दिन 23 जनवरी की शाम महासमुन्द जिले के कवियों को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया था. महासमुन्द के अशोक शर्मा, बन्धु राजेश्वर खरे, प्रलय थिटे,श्रीमती साधना कसार और श्रीमती एस. चन्द्रसेन, बागबाहरा के हबीब समर, पिथौरा के प्रवीण प्रवाह, एफ. ए. नंद और मैंने काव्य पाठ किया.
छत्तीसगढ़ के साहित्यिक इतिहास में राज्य सरकार के जनसम्पर्क विभाग का यह तीन दिवसीय कार्यक्रम रायपुर साहित्य उत्सव 2026 एक यादगार आयोजन के रूप में दर्ज हो गया.विभाग ने सभी विधाओं के वरिष्ठ और कनिष्ठ, हर तरह के रचनाकारों को मंच प्रदान करने का सराहनीय प्रयास किया. पुस्तक मेले के रूप में कई प्रकाशकों के स्टाल भी लगाए गए थे, जिनमें प्रदेश के नये -पुराने साहित्यकारों की किताबें भी प्रदर्शित की गई थीं. कुछ पुस्तकों का विमोचन भी हुआ.
यह भव्य और ऐतिहासिक आयोजन तीन दिनों की अपनी मधुर स्मृतियाँ देकर 25जनवरी को चला गया. साहित्य उत्सव के शानदार और सफल आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और उनके जनसम्पर्क विभागऔर उनकी पूरी टीम लिए तारीफ़ और बधाई ज़रूर बनती है, जिन्होंने साहित्यकारों और कलाकारों को अभिव्यक्ति का खुला आकाश दिया.मुझे छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय संत कवि स्वर्गीय पवन दीवान की एक बात अक्सर याद आती है. उन्होंने एक बार मुझसे कहा था -"लेखकों और कवियों को साहित्यिक आयोजनों में यथा संभव ज़रूर जाना चाहिए, क्योंकि वहाँ जाने पर ही पता चलता है कि हमारी साहित्यिक बिरादरी कितनी विशाल है." रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में भी साहित्यिक बिरादरी के विराट स्वरूप की एक सुन्दर झलक देखने को मिली.
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