(आलेख - स्वराज्य करुण )
मध्यप्रदेश में पहाड़ों की रानी के नाम से प्रसिद्ध पचमढ़ी का संबंध महाभारत काल और गुप्त काल से भी है. ऐसा बताया जाता है कि पचमढ़ी का नामकरण यहाँ सतपुड़ा पर्वत के एक हिस्से की पहाड़ी में निर्मित पाँच गुफाओं के आधार पर हुआ है, जो पाण्डव गुफा के नाम से प्रसिद्ध हैं. लोगों की ऐसी धारणा है कि वनवास का कुछ समय पाण्डवों ने इन गुफाओं में गुज़ारा था.वहीं इन्हें गुप्त काल में यानी चौथी, पांचवी शताब्दी ईस्वी में निर्मित भी माना जाता है. इस आधार पर कहा जा सकता है कि ये गुफाएँ डेढ़ हजार साल से भी अधिक पुरानी हैं
पाण्डव गुफाओं की ओर जाते हुए पर्यटक
मुझे जनवरी 2025 के आख़िरी दिनों में से एक दिन वहाँ जाने का अवसर मिला, लेकिन गुफाओं तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों की सुविधा होने के बावजूद थकावट की वजह से मैं उन गुफाओं को देखने नहीं जा पाया और नीचे बने मनोरम उद्यान को और परिसर में लगे सूचना बोर्ड्स को देखकर ही अपनी जिज्ञासाओं को शांत करता रहा.गाइड ने बताया कि उद्यान विभाग द्वारा एक पथरीली बंजर जमीन को बड़ी मेहनत से सींचकर इसे एक सुन्दर बगीचे के रूप में विकसित किया गया है. इसे 'पाण्डव उद्यान'नाम दिया गया है. वर्ष 1989 में स्थापित इस उद्यान में तरह -तरह के रंग बिरंगे फूलों के पौधे सबका मन मोह लेते हैं.
गुफाओं के नीचे परिसर में हिन्दी और अंग्रेजी में सूचना फलक भी लगे हुए हैं.हिन्दी में अंकित विवरण में बताया गया है -
"यह इस क्षेत्र की प्रसिद्ध पाँच गुफाएं हैं, जिनके आधार पर ही पचमढ़ी नाम हुआ है. ऐसी धारणा है कि पाण्डवों ने अपने वनवास के दौरान यहाँ कुछ समय व्यतीत किया था. यह गुफाएं सामान्य विन्यास की हैं तथा कुछ में स्तंभ युक्त वरामदा निर्मित है. गुफा क्रमांक दो के सामने वाले भाग में साधारण चैत्य गवाक्ष आलेख देखा जा सकता है. गुफा क्रमांक तीन के कोष्ठ का प्रवेश द्वार शाखाओं से अलंकृत है. जिनके निचले भाग में लघु देव आकृतियाँ बनी हुई हैं. गुफा क्रमांक तीन में एक उत्कीर्ण अभिलेख है, जिस पर लिखा है कि उत्कीर्ण भगावकेण, अर्थात यह गुफा भगवक नामक व्यक्ति द्वारा बनाई गई थी, जो संभवतः एक भिक्षु था. इसके आधार पर इसका निर्माण गुप्त काल (चौथी या पांचवी शताब्दी ई. )में हुआ होगा. इसी आधार पर ये गुफाएं बौद्ध धर्म से संबंधित हो सकती हैं. इस पहाड़ी के ऊपरी भाग में पक्की ईटों द्वारा निर्मित पुरावशेष हैं. यह संभवतया किसी स्तूप से संबंधित रहे होंगे."
पाण्डव गुफाओं के बारे में प्रदर्शित सूचना फलक
इन गुफाओं को भारत सरकार ने प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्विक स्थल अवशेष अधिनियम 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया है. इस आशय का सूचना फलक भी वहाँ प्रदर्शित है, जिसमें यह चेतावनी भी लिखी हुई है कि यदि कोई भी इस स्मारक को क्षति पहुंचता, नष्ट करता, विलग अथवा परिवर्तित करता, कुरूप करता, खतरे में डालता या दुरूपयोग करते हुए पाया जाता है तो उसे इस अपकृत्य के लिए 3 महीने तक का कारावास या 5000 (पाँच हजार रूपये )तक जुर्माना अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है.इनका संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जबलपुर मंडल द्वारा किया जा रहा है.वहीं एक अन्य सूचना बोर्ड में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल ने पर्यटकों से निवेदन किया है कि स्मारक के उन हिस्सों के ऊपर न चढ़ें, जो चढ़ने के लिए नहीं हैं. स्मारक परिसर में कचरा नियत स्थान पर ही फेंकें. वहीं इस बोर्ड में अधीक्षण, पुरातत्वविद भोपाल ने पर्यटकों से सुझाव एवं सम्मतियाँ भी आमंत्रित की हैं.
और भी कई अपेक्षाएं पर्यटकों से की गयी हैं.लेकिन गुफाओं को देखकर नीचे आने पर मेरे परिजनों ने मुझे बताया कि कुछ पर्यटकों द्वारा सूचना फलकों पर अंकित चेतावनी और अपील की अनदेखी करते हुए ऊपर की गुफाओं में से एक गुफा में काफी गंदगी फैलाई गई है.शायद वह नकुल की गुफा है.
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