लघुकथा
स्वतंत्र देश का 'स्वतंत्र ' गुण्डा !
(लेखक - स्वराज्य करुण )
उस दिन सुबह -सवेरे चार सीधे -सादे , कुछ पढ़े -लिखे मज़दूर आदमी काम पर जाने से पहले अपने मोहल्ले की एक गुमटी में चाय पी रहे थे और दीन -दुनिया की चर्चा भी कर रहे थे.उनमें से एक ने बाकी तीनों से पूछा -
"अच्छा, आप लोग जरा ये बताइए, ऐसी स्वतंत्रता और कहाँ मिलेगी, जहाँ दुनिया के किसी स्वतंत्र देश में 'स्वतंत्र' नामक गुण्डा टीव्ही पर खुले आम इंटरव्यू दे और पूरी दमदारी से कहे कि हाँ उसने एक ग़रीब आदमी का सिर फोड़ा, इसके बाद भी कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाया?"
दूसरा आदमी बोला -"हाँ,उसका यह भी कहना था कि उस स्वतंत्र देश के बड़े -बड़े ताकतवर लोग उसके बड़े भाई हैं और उनका आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहता है और अपराध करने के बाद भी इन ताकतवर लोगों के आशीर्वाद से ही आज वह आज़ाद घूम रहा था."
तीसरे ने कहा -" लेकिन धन्य है उस स्वतंत्र देश का वह प्राइवेट चैनल, जिसने पॉडकास्ट के रूप में उस अपराधी का इंटरव्यू भी प्रसारित किया. कल शाम फिर उस देश के एक चैनल में उसके एक बयान की यह पट्टी भी दिखाई गई, कि कोई उसका बाल बाँका भी नहीं कर सकता, चाहे ट्रम्प आए या नेतन्याहू ! "
यह सुनकर पहला आदमी बोला -" हालांकि फिर ये भी ख़बर आई कि उस 'स्वतंत्र गुण्डे' को पकड़ लिया गया है.लेकिन पकड़ लिए जाने से पहले वह पूरी अकड़ के साथ गुंडागर्दी के अपने अपराध को गर्व के साथ और बेशर्मी से टीव्ही पर स्वीकार भी करता रहा ?सोचने वाली बात ये है कि पकड़ में वह आख़िर कब तक रहेगा? उस देश में तो राम और रहीम के नाम को बदनाम करने वाला एक शातिर अपराधी सीखचों के पीछे आराम फरमाता है और अपनी मर्जी से, जब चाहे, तब थोड़े -थोड़े दिनों के बाद दुनिया की सैर करने बाहर आता -जाता है. बताओ भला,उस देश का समाज कहाँ जा रहा है?"
चौथे आदमी ने कहा -"समाज कहीं जाए, हमको तो अपने काम पर जाना है, नहीं तो आज की मज़दूरी कैसे मिलेगी? स्वतंत्र नामक वह गुण्डा तो एक न एक दिन अपनी इसी गुंडई ताकत के दम पर उस स्वतंत्र देश को अपना गुलाम बना ही लेगा और वहाँ का नेता भी बन जाएगा,लेकिन फिलहाल तो हमें आज की अपनी मज़दूरी की चिन्ता है." यह कहते हुए वे सब लोग अपने -अपने काम पर निकल पड़े!
- स्वराज्य करुण
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