Thursday, July 30, 2026

(पुस्तक -चर्चा )सबकी ख़ुशहाली के लिए 'मेरे दिल की बात ' (आलेख - डॉ. परदेशी राम वर्मा )

 मेरे काव्य -संग्रह पर छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय डॉ. परदेशी राम वर्मा जी के मूल्यवान विचार, उनके समीक्षात्मक आलेख में, जो उन्हें धन्यवाद सहित यहाँ प्रस्तुत हैं -

सबकी ख़ुशहाली के लिए 'मेरे दिल की बात '

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 'मेरे दिल की बात' छत्तीसगढ़ के सुपरिचित कवि स्वराज्य करुण का नया काव्य -संग्रह है. इस संग्रह में उन्होंने अपनी 62 कविताओं को संकलित किया है. भिन्न -भिन्न रंग की रचनाओं के माध्यम से अपने दिल की बात कहने का उन्होंने सुन्दर प्रयत्न किया है. स्वराज्य करुण यूँ तो गद्य लेखक के रूप में भी विशेष पहचान रखते हैं, किन्तु मूलतः वे कवि हैं. विगत चालीस वर्षो से वे कविताएँ लिख रहे हैं. उन्होंने बच्चों के लिए भी ख़ूब लिखा है. गीत विधा और ग़ज़ल पर भी उनका भरपूर अधिकार है. वे सरलता के आग्रही हैं. गीतों, ग़ज़लों में भी उनका यह आग्रह देखते ही बनता है -

     "ये अपनी धरती 

     धान का सागर है,

     दूर -दूर तक फैले 

      प्रेम के आखर हैं."

यह बहुत प्रभावी प्रयोग है. छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है -इस मुहावरे पर मुग्ध माटी -पुत्र स्वराज्य  करुण ने कितना विराट आकार देने का यत्न किया है!कटोरे को उन्होंने 'धान का सागर ' कहा और धान के भरे -भरे खेतों को 'प्रेम का आखर 'कहा. छत्तीसगढ़ प्रेम, समता, अहिंसा और मेल -मिलाप की धरती है.यह धान उपजाने वाला 'धान का सागर 'है.धान के खेत इसीलिए 'प्रेम के आखर' के रूप में कविता में आए हैं.  स्वराज्य करुण का जन्म गरियाबंद में हुआ. छत्तीसगढ़ का यह हरा -भरा क्षेत्र बेहद सुन्दर है. इस क्षेत्र की सुन्दरता का असर कवि पर होना स्वाभाविक है. उन्होंने अपने जन्म स्थल के सौंदर्य को सदैव रेखांकित किया है -

       "नीला पर्वत, निर्मल नदियाँ और यह तालाब,

       लगता जैसे दिन में भी कोई सुन्दर ख़्वाब. 

       सौ -सौ जनम इस धरती पर रहे सदा आबाद,

      एक अनोखा सुख देती है हमको इसकी याद."


                          




                                                          डॉ. परदेशी राम वर्मा 

इस संकलन में अधिकांश कविताएँ प्रकृति की सुन्दरता पर हैं. लेकिन हमारे दौर की विसंगतियों पर भी संग्रह में प्रभावी रचनाएँ हैं. एक तरफ प्रकृति की सुन्दरता पर कवि मुग्ध होकर बार -बार इसी छत्तीसगढ़ में जन्म लेने की कामना करता है तो दूसरी ओर विरूपित हो रही दुनिया के संताप को महसूस कर व्यथित भी होता है-

     "बेच रहे देश को आसान किश्तों में,

     ग्राहकों की कमी नहीं इस कारोबार में.

     बिक जाएगा वतन देखते ही देखते,

     ध्यान अगर गया नहीं वतन की पुकार में."

विसंगतियों पर प्रहार करने का करुण जी का यह अंदाज ध्यान आकृष्ट करता है -

      "कैसे -कैसे मंज़र आए गाँधी जी के देश में,  

      फूल नहीं अब खंजर आए गाँधी जी के देश में "

इस संग्रह में गीत, ग़ज़ल और नई कविताएँ एक साथ हैं. दिल की बात है,  जिस ढंग से भी अभिव्यंजित हो. स्वराज्य करुण हिन्दी, छत्तीसगढ़ी और ओड़िया, तीन भाषाओं के जानकार हैं. उन्होंने वर्ष 1985 में नृसिंहनाथ मंदिर पर केंद्रित निराकार महालिक की ओड़िया भाषा में लिखित पुस्तक का हिन्दी अनुवाद किया था. वर्ष 2002 में उनका बालगीत संग्रह प्रकाशित और चर्चित हो चुका है.'   'हिलमिल सब करते हैं झिलमिल' संग्रह में उनकी चर्चित बाल कविताएँ हैं. 

    विद्यार्थी जीवन से ही लगातार लिखते रहने वाले स्वराज्य करुण जब विभिन्न दायित्वों से जुड़कर वैचारिक लेखन करते हैं, तब भी पठनीयता की शर्तों का ध्यान रखते हैं. प्रस्तुत संग्रह 'मेरे दिल की बात 'की कविताओं में उन्हें मुक्त उड़ान भरने का अवसर लगा है, जिसका उन्होंने ख़ूब लाभ भी लिया है. व्यवस्था से जन्मी विसंगतियों पर प्रतीकों में मर्यादित प्रहार करने का अवसर उन्होंने नहीं खोया है. तमाम निराशा और हताशा से भरे दौर में भी वे आशान्वित हैं. वे बहुत बड़ी आशा भी नहीं करते. वे आम आदमी के कवि हैं. इसलिए केवल यही कामना करते हैं -

   "न तरसे कोई दो वक़्त की थाली के लिए,

   दुआ करें सबकी ख़ुशहाली के लिए."

        

         आलेख  -डॉ. परदेशी राम वर्मा 

           एल. आई. जी. 18,

          आमदी नगर, भिलाई 490009 

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कृति : मेरे दिल की बात 

कवि : स्वराज्य करुण 

प्रकाशक : जी. नाइन पब्लिकेशन, 

रायपुर

प्रकाशन वर्ष 2011

मूल्य ; 50 रूपए 

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