Monday 9 January 2012

कृष्ण कन्हैया की धरती पर यह कैसा कलंक ?

खबर  आयी है कि भगवान कृष्ण कन्हैया की पवित्र भूमि वृन्दावन में संचालित सरकारी आश्रय गृहों की अनाथ विधवाओं के मरने के बाद उनके शरीर के टुकड़े -टुकड़े करके स्वीपरों द्वारा जूट की थैलियों में भर कर यूं ही फेंक दिया जाता है !   यह समाचार कल एक हिन्दी सांध्य दैनिक 'छत्तीसगढ़ ' में प्रकाशित हुआ है, जो अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू ' में छपी खबर का अनुवाद है.  अगर यह खबर सच है तो  यह भयंकर अमानवीय और शर्मनाक करतूत हमारे लिए राष्ट्रीय शर्म की बात  है .  क्या आज का इंसान इतना गिर चुका है कि किसी मानव के निर्जीव शरीर को सदगति देने के बजाय वह उसके टुकड़े-टुकड़े कर  किसी गैर ज़रूरी सामान की तरह कचरे में फेंक दे ? 
   छपी खबर  के अनुसार वहाँ ऐसा इसलिए होता है ,क्योंकि इन असहाय और अनाथ महिलाओं की मौत के बाद उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं है.  यह ह्रदय विदारक जानकारी वहाँ के जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण की सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आयी है. यह भारत के एक ऐसे प्रदेश की खबर है,जिसकी बागडोर एक महिला के हाथों में है और जहां हाथियों की निर्जीव मूर्तियों को बनवाने और लगवाने में करोड़ों-अरबों रूपए जनता के खजाने से खर्च करने में जनता के भाग्य विधाताओं को ज़रा भी शर्म महसूस नहीं होती.  ज़रा सोचिये ! अगर ये अनाथ विधवाएं देश के भाग्य विधाताओं के परिवारों की होतीं , तब वे क्या करते ? 
           क्या कर्म योगी भगवान कृष्ण की नगरी वृन्दावन में  कोई ऐसी समाज सेवी संस्था नहीं है, जो लावारिस समझी जाने वाली इंसानी लाशों का ससम्मान अंतिम संस्कार कर सके ? वृन्दावन के लोगों को  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की सामाजिक संस्था 'मुक्ति श्रद्धांजलि ' से प्रेरणा लेनी चाहिए . वृन्दावन की विधवाओं की मौत के बाद उनकी लाशों की दुर्गति की यह खबर हम चाहते हैं कि गलत निकले .यह समाचार  पीड़ादायक तो है ही ,अविश्वसनीय भी है , फिर भी मानवता के हित में इसका संज्ञान लेकर मामले की तत्काल जांच की जानी चाहिए,ताकि अगर इसमें जरा भी सच्चाई मिले तो कृष्ण कन्हैया की पावन धरती में मानवता के माथे पर लगे इस कलंक को धोया जा सके .
                                                                                                                      ---  स्वराज्य करुण

15 comments:

  1. ह्रदय को झकझोरनेवाली खबर दी है आपने.सत्य को परखने की बात मत कीजिये बात सत्य ही होगी. इस निर्मूल्य होते मानवीय संबंधों के लिए कुछ करने के लिए अन्ना जैसे आन्दोलन की जरूरत है और उससे पहले अपने हृदयों को स्वक्छ करने की भी

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  2. आपकी खबर से तो मैं कांप गई हूँ ...क्या ऐसा भी कहीं हो सकता है ?
    बहुत ही मार्मिक और हृदयविदारक प्रसंग

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  3. अगर सच है तो निन्दनीय बै!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  4. उफ़्फ़ हद है बेशर्मी की ....समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  5. आप सही कहते हैं स्वराज्य भईया... यह सचमुच राष्ट्रीय शर्म का विषय है...
    जब यह समाचार पढ़ा तो सन्न रह गया था... आपने तो मेरी ही भावनाएं अभिव्यक्त कर दीं...
    सादर.

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  6. जो पढ़ने में ही वीभत्स लगे उसे किस तरह से अंजाम दिया गया होगा,राष्ट्रीय शर्म का विषय है,यदि केवल वित्तीय प्रावधान न होने की वजह से यह हो रहा है तो हम यथाशक्ति आर्थिक सहयोग देने को तैयार हैं,कृपया पहल करें.

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  7. समूचा भारत वर्ष ही कृष्ण की भूमि है ..
    क्या आज हर स्थान पे इस भूमि के साथ अन्याय नहीं हो रहा ?
    झकझोर देने वाली खबर ..
    निंदनीय ..
    kalamdaan.blogspot.com

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  8. कृष्ण कन्हैया की धरती पर यह कैसा कलंक ?

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  9. बहुत अफ़सोस की बात है कि श्री कृष्ण जी की धरती पर महिलाओं की दुर्दशा हो रही है .
    विधवा समस्या का हल केवल पुनर्विवाह है .
    इस्लाम यही व्यवस्था देता है.
    विधवाओं की समस्या हल करना किसी सरकार या किसी संस्था के बस की बात नहीं है. इसे तो बस ऊपर वाला ही हल कर सकता है और यह तब हल होगी जब आप उसकी व्यवस्था का पालन करेंगे .
    आपकी पोस्ट का चर्चा किया गया है 'ब्लॉग की खबरें' पर
    http://blogkikhabren.blogspot.com/2012/01/blog-post_09.html

    और एक हकीक़त आपका इंतज़ार कर रही है यहाँ , देखिये

    http://www.charchashalimanch.blogspot.com/

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  10. एसी मूर्खतापूर्ण खबरों को चर्चामन्च पर लाना भी मूर्खता है....

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  11. बेहद शर्मनाक ...आज के पढ़े लिखे समाज को कलंकित करती ये रिपोर्ट

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  12. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय पोस्ट....

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  13. ye darsata hai ki dekhiye simaent or pattharon ke gharon mai rah kar ham manav jati ke log bhi patthar hote ja rhe hain.hamari bhabnayen ,hamari samvednayen din pe din marti jarehi hain.........

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  14. खबर यदि सच्ची है तो सचमुच दर्दनाक़ है। धर्म और मानवता की सेवा के नाम पर इतनी संस्थायें होते हुए भी ऐसा अनाचार होना क्या दर्शाता है?

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  15. न तो यह बताया की किस दिन का अखबार इस खबर को छपा है न ही कोई लिंक दिया इससे ही ज्ञात होता है की यह खबर कितनी विश्वसनीय है
    श्याम जी आजकल तो मूर्खों की ही चर्चा होती है हर तरफ, आप इससे चकित न हों

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