Wednesday 21 September 2011

प्याज से आएँगे खून के आँसू !


देश के हर घर की रसोई में सलाद और सब्जियों के लिए ज़रूरी आयटम है प्याज ,लेकिन क्या अब वह भी हमें रुलाएगा खून के आंसू? आज के अखबारों की सुर्खियाँ देख कर तो दिल में यही सवाल कौंध रहा है.नई  दिल्ली से खबर  छपी है कि भारत से विदेशों के लिए प्याज भेजने पर इसी महीने की आठ तारीख को अ जो पाबंदी लगी हुई थी ,उसे सिर्फ बारह दिनों के भीतर यानी  कल  से हटा लिया गया है .यानी अब प्याज निर्यात किया जा सकेगा. क्या इससे हमारे देश में प्याज की मांग के मुकाबले आपूर्ति कम नहीं होगी और क्या इसके फलस्वरूप देश के खुले बाज़ारों में इसकी कीमत और भी ज्यादा नहीं बढ़ जाएगी ? कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों ने प्याज निर्यात पर लगे प्रतिबंध का भारी विरोध किया था , इसलिए उनकी मांग स्वीकार करते हुए केन्द्र ने निर्यात पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया है. क्या इन दोनों राज्यों के किसान देश के अन्य राज्यों की जनता के हितैषी नहीं हैं ?क्या महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों को महंगाई से परेशान देश की कोई फ़िक्र नहीं है ? ऐसा तो सोचा भी नहीं जा सकता .समाचारों में यह स्पष्ट नहीं है कि इन दोनों राज्यों के कितने किसानों ने कब और कहाँ प्याज निर्यात पर पाबंदी का विरोध किया था ? दरअसल यह सारा खेल और कुचक्र कुछ मुट्ठी भर ऐसे लोगों का है ,जो देश के बाज़ारों में अनाज और दूसरी खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में इसी तरह का खलल डालकर महंगाई बढाने में लगे रहते. हैं ! क्या हमारे किसानों को देशी बाजारों में प्याज की बेहतर कीमत नहीं मिल सकती ? क्या महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान आम भारतीयों से अलग है?वास्तव में ऐसा कुछ भी नही है ,लेकिन यह मात्र मुट्ठी भर मुनाफाखोर व्यापारियों की साजिश है, जो भोलेभाले किसानों के नाम पर ऐसा घटिया खेल खेल रहे हैं ,जिससे देश की जनता महंगाई के कुचक्र में फँसी रहे और मुनाफाखोरों के महलों में दौलत की बारिश होती रहे !
                                                                                                              स्वराज्य करुण

7 comments:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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  2. अब ये लोग प्याज मंहगा करने के चक्कर में हैं
    यही सब तो चल रहा है इस देश में.

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  3. बिल्‍कुल सही कहा है आपने ।

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  4. क्या -क्या खेल रचातें हैं ये लोग ......

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  5. किसान की नियति ही लुटना और धोखा खाना है।

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  6. बिल्‍कुल सही कहा है आपने ....

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