Friday, June 9, 2023

(पुस्तक -चर्चा )मंदिर सलामत है : हमारे सामाजिक परिवेश की कहानियाँ

शिवशंकर पटनायक की सैंतीसवीं किताब (आलेख : स्वराज करुण ) विभिन्न विधाओं की साहित्यिक रचनाओं की तरह कहानियाँ भी हमारे सामाजिक परिवेश में ही लिखी जाती हैं। उनका ताना -बाना हमारे समाज में होने वाली सुखद या दुःखद घटनाओं पर ही बुना जाता है। यह ताना -बाना कोई भी रचनाकार अपनी कल्पनाओं के धागों को यथार्थ के रंगों में रंगकर ही बुनता है। ऐसे अग्रणी रचनाकारों में छत्तीसगढ़ के शिवशंकर पटनायक भी शामिल हैं । वे इस प्रदेश के उन साहित्यकारों में से हैं , जो ग्रामीण परिवेश के निवासी हैं और महासमुंद जिले के पिथौरा जैसे छोटे -से गाँवनुमा कस्बे में रहकर समर्पित भाव से साहित्य की सेवा कर रहे हैं। उनकी साहित्य -साधना अर्ध -शताब्दी से भी अधिक समय से अनवरत जारी है। कहानियाँ ,निबंध और उपन्यास उनके लेखन की प्रमुख विधाएँ हैं। उनका नवीनतम कहानी संग्रह 'मंदिर सलामत है ' हाल ही में प्रकाशित हुआ है।यह उनकी सैंतीसवीं किताब है। अब तक 37 किताबों का लेखन और प्रकाशन साहित्य साधना के प्रति उनके समर्पण और उनकी असाधारण साहित्यिक प्रतिभा का सबसे बड़ा उदाहरण है। उनकी ताजातरीन किताब 'मंदिर सलामत है' कुल 10 कहानियों का संकलन है। संग्रह की पहली कहानी 'मंदिर सलामत है ' एक कस्बे मे हुए दो वैवाहिक आयोजनों पर लिखी गयी है। यहाँ मंदिर से लेखक का आशय घर-परिवार से है , जिसे सलामत रखना हम सबकी जिम्मेदारी है । रंग -भेद की सामाजिक बुराई को भी इसमें उकेरा गया है।
इन वैवाहिक आयोजनों में में से एक में नायिका सांवले रंग की होने के कारण समाज के कुछ लोग उसकी आलोचना करते हुए सगाई और विवाह को तोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाते और नेहा और प्रभाष का विवाह सम्पन्न हो जाता है । दूसरी घटना उस परिवार में घटती है ,जिसके मुखिया की पत्नी श्रीमती उर्मिला दास ने मिस्टर षड़ंगी की उच्च शिक्षित सहायक प्राध्यापिका बिटिया नेहा के काले रंग को लेकर सार्वजनिक रूप से प्रतिकूल टिप्पणी की थी। लेकिन वहीं जब उस परिवार की बेटी पूनम की शादी के दौरान कुछ लोग अफवाहों से प्रभावित होकर उस बेटी पर चरित्रहीनता का लांछन लगाते हैं और वैवाहिक अनुष्ठान में व्यवधान डालने का प्रयास करते हैं ,तब मिस्टर षड़ंगी की समझाइश पर ही पूनम का विवाह निर्विघ्न सम्पन्न हो जाता है। यहाँ लेखक ने इन दोनों घटनाओं का वर्णन आत्मकथ्य के रूप में किया है। लेखक को पूनम के पिता मिस्टर दास हाथ जोड़कर कहते हैं -- षड़ंगी साहब , आपने तो पूनम बिटिया का मंदिर बनाकर पुण्य अर्जित कर लिया, किंतु मैंने और मेरी पत्नी ने नेहा बिटिया का मंदिर ध्वंस कर जो पाप किया है , उसका प्रायश्चित हम किस प्रकार करेंगे? लेखक कहते हैं कि मैंने मिस्टर दास को आलिंगन में भरकर कहा -"आपको और आपकी धर्मपत्नी को नेहा को लेकर अपराध-बोध पालने की तनिक भी आवश्यकता नहीं है ,क्योंकि महाकाल महादेव की अति कृपा से उसका मंदिर सलामत है।" संग्रह की अन्य कहानियों में (1) अधिकारी (2)जोजवा (3)मेहरबानी का कर्ज (4)कर्म -दंड (5) दाऊजी (6) तुमने सही कहा था (7)कर्त्तव्य -बोध (8) आक्रोश और (9) चैती शामिल हैं। ये कहानियाँ भी हमारे सामाजिक परिवेश के इर्दगिर्द होने वाली घटनाओं को रेखांकित करती हैं । संग्रह की प्रत्येक कहानी में कोई न कोई सार्थक सामाजिक संदेश ज़रूर गूंजता है। शिवशंकर पटनायक के प्रकाशित अन्य कहानी संग्रहों में (1)पराजित पुरुष (2) प्रारब्ध (3) पलायन और (4) डोकरी दाई भी काफी चर्चित और प्रशंसित हैं। उनके अधिकांश उपन्यास पौराणिक पात्रों और घटनाओं पर आधारित हैं।इनमें महाभारत की पृष्ठभूमि पर आधारित (भीष्म प्रश्नों की शर-शैय्या पर (2)कालजयी कर्ण और (3) एकलव्य भी उल्लेखनीय हैं । उन्होंने महाभारत की प्रमुख पात्रव कुन्ती और रामायण की मंदोदरी पर भी उपन्यासों की रचना की है। रामायण के पात्रों पर आधारित 'अग्नि स्नान' सहित 'कोशल नंदिनी ' जैसे उनके उपन्यास भी काफी प्रशंसित रहे हैं।उनका उपन्यास 'अग्नि स्नान ' रामायण के खलनायक 'रावण ' के आत्मकथ्य पर आधारित है।शिवशंकर पटनायक ने छत्तीसगढ़ के लोक देवता करिया धुर्वा पर भी एक उपन्यास लिखा है। उनके सहित निबंध संग्रहों में (1) आप मरना क्यों नहीं चाहते (2) भाव चिन्तन और (3)मानसिक दशा एवं दर्शन सम्मिलित हैं। आलेख - स्वराज करुण

1 comment:

  1. अच्छी विमोचन, लेखक को हार्दिक शुभकामनाएं।

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