Thursday, October 3, 2019
(कविता ) जड़ें तलाश रहीं अपनी ज़मीन !
›
-स्वराज करुण सुबह और शाम , रात और दिन , बेहद बेचैन होकर जड़ें तलाश रही अपनी ज़मीन ! ...
1 comment:
Wednesday, October 2, 2019
गाँधीजी से एक मुलाकात : अपने हत्यारे को मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ !
›
- स्वराज करुण बीती रात महात्मा गाँधी मेरे घर आए । मैंने उनका स्वागत करते हुए कहा - हे राष्ट्रपिता ...
2 comments:
Tuesday, October 1, 2019
(आलेख ) देश को मदिरालय चाहिए या भोजनालय ,मधुशाला चाहिए या पाठशाला ?
›
- स्वराज करुण हर साल जब हम दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयंती मनाते हैं तो मद्य - निषेध ...
Sunday, September 29, 2019
(आलेख ) विदेशी मदिरा के स्वदेशी ग्राहक !
›
- स्वराज करुण भारत में आजकल दूध -दही की दुकानों से ज्यादा भीड़ शराब की दुकानों में उमड़ती नज़र आती है ।वह भी विदेश...
1 comment:
(कविता ) ढूंढो अब कोई राह अनजानी !
›
-स्वराज करुण तरह -तरह के ज्ञानियों की भीड़ जहाँ एक अकेला मैं अज्ञानी ! किसम -किसम के ज्ञान की बातें सुन -सुन कर ह...
Saturday, September 28, 2019
(आलेख )दक्षिण कोसल में लघु पत्रिका आंदोलन : एक वो भी ज़माना था !
›
-स्वराज करुण आधुनिक हिन्दी साहित्य की विकाश यात्रा में लघु पत्रिका आंदोलन का भी एक नया पड़ाव आया था । देश के हि...
2 comments:
Wednesday, September 25, 2019
(लघु कथा ) खौफ़नाक मंज़र ...!
›
- स्वराज करुण शहर से लम्बे अरसे बाद गाँव पहुंचे रामलाल गायकवाड़ अपनी आप-बीती कुछ यूं सुन...
1 comment:
‹
›
Home
View web version