Thursday, January 21, 2016
क्या झूठ और सच के भी होते हैं कई रंग ?
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हे राजन ! क्या झूठ और सच के भी कई रंग होते हैं ? किसी बात को झूठलाने के लिए ऐसा क्यों बोला जाता है कि यह सरासर 'सफेद झूठ' है ? झ...
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Sunday, January 17, 2016
थर-थर काँपे भारत माई ..!
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समरथ को नहीं दोष गोसाईं , देश की दौ...
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Tuesday, January 12, 2016
प्रश्न-गीत !
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एक अनबूझी पहेली, ...
Thursday, January 7, 2016
(ग़ज़ल ) तुमने क्या कर डाला है !
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हाय मेरे वतन के लोगों , तुमने क्या कर डाला है , कदम-कदम पर आज हर तरफ उनका बोलबाला है ! चालें उनकी समझ न आयी हमको भी और तुमको भी इसीलिए...
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Wednesday, January 6, 2016
(गीत) उत्तर है लापता !
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कहाँ है क्या पता , उत्तर है लापता ! ...
मायावी शिकारी फेंक रहे जाल !
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कभी नज़र आता था नीला आकाश , अब नज़र आते है खूंखार चेहरे ! न जाने किसकी लगी नज़र झील के शांत स्वच्छ पानी को , गुनगुनाती लहरों को...
Tuesday, January 5, 2016
क्या फर्क पड़ता है ?
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समय की स्याही से लिखे इतिहास के पन्ने सूखकर पीले पड़ जाते हैं और पतझर के पत्तों -सा झर जाते हैं ! टेप काण्ड हो या रेप काण्ड . उनका भी ...
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