Thursday, December 16, 2010
खतरे की घंटी और हम कुम्भकर्ण !
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स्वराज्य करुण खतरे की घंटी बज रही है...
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Wednesday, December 15, 2010
(गीत) खेत- खलिहान उजड़ने न देंगे !
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ये देश हमारा है ,हम इसकी शान उजड़ने न देंगे ! ...
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Monday, December 13, 2010
अपने देश का गीत
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- स्वराज्य करुण ...
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Sunday, December 12, 2010
बेमौसम , बेरहम, बेमतलब बादल !
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अगहन के इस मौसम में जब हर सुबह वन-उपवन और घर-आंगन में निर्मल नीले आकाश के नीचे गुनगुनी धूप की एक अलग ही रौनक होनी चाहिए , आज फिर ...
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Saturday, December 11, 2010
(गजल ) मधुवन में आग लगा गए !
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स्वराज्य करुण ...
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Friday, December 10, 2010
(गीत) किरणें धोखेबाज हो गयीं !
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Thursday, December 9, 2010
(गज़ल) भले इंसान पर सितम की बारिश
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स्वराज्य करुण ...
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