(लघुकथा)
कानून बनाने वाले का बेटा
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सुबह -सवेरे अख़बार पढ़कर बेटे ने अपने मज़दूर पिता से पूछा -- कानून अगर सबके लिए बराबर है ,तो फिर ' उसके ' लिए क्यों नहीं ,जिस पर नशे में धुत होकर अपनी कार से पाँच मज़दूरों को कुचलकर मार डालने का गंभीर आरोप लगा है? क्या उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा? पिता ने कहा -तुम्हारा सवाल जायज है, उस अमीर नशेड़ी का कुछ भी नहीं बिगड़ेगा।कानून उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा।बेटे ने पूछा -"लेकिन क्यों?"
--"क्योंकि वह कानून बनाने वाले का बेटा है। उसका बाप हस्तिनापुर की एक बहुत बड़ी गोलाकार इमारत में अपने जैसे कई लोगों के साथ बैठकर जनता की किस्मत तय करने के लिए तरह -तरह के कानून बनाता है। इसलिए वह और उसका बेटा कानून से परे हैं । " - मज़दूर पिता का जवाब सुनकर उसका बेटा ख़ामोश रह गया ।
- स्वराज्य करुण,
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