Monday, April 29, 2019
(आलेख ) वन देवी और वन देवता !
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-स्वराज करुण हमारे पूर्वजों ने पेड़ -पौधों में देवी -देवताओं का निवास होने की जो धारणा समाज को दी है ,उसे अं...
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Sunday, April 28, 2019
( आलेख ) वो भी क्या दिन थे ?
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-- स्वराज करुण आजकल कोई गर्मियों में घर के बाहर यानी आँगन में या छत पर नहीं सोता । न गा...
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Tuesday, April 23, 2019
(आलेख) आख़िर वो गए तो गए कहाँ ?
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-- स्वराज करुण घरेलू या पारिवारिक डॉक्टर गाँवों , कस्बों और छोटे शहरों में भले ही कभी - कभार नज़र आ जाते हों ,लेकिन कड़वी सच्चा...
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Thursday, April 18, 2019
व्यंग्य : कहीं पे निगाहें ...कहीं पे निशाना !
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- स्वराज करुण कुछ सज्जन जैसे दिखने वाले लोग मन्दिर में हाथ जोड़कर पूजा करते हुए अपनी फोटो फ...
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Wednesday, April 17, 2019
छत्तीसगढ़ की धरती पर 15 साल से रेगिस्तानी जहाजों का डेरा !
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-स्वराज करुण रेगिस्तान के जहाज वन सम्पदा से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ की सड़कों पर पिछले करीब 15 साल से विचरण कर रहे हैं । उनकी...
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Sunday, September 3, 2017
ईमानदार हो या बेईमान -सबको आशीर्वाद देते हैं भगवान !
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ईमानदार हो या बेईमान ,सबको आशीर्वाद देते हैं भगवान ! उसके दरबार में हर तरह के लोग आते-जाते रहते हैं !. जैसे वह कोई नेता हो ,जिसके घर सुबह ...
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Saturday, September 2, 2017
शायद कभी सुलग उठें राख में दबे विचार
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क्या टेक्नॉलॉजी में बदलाव से इंसान की मानसिकता भी बदल जाती है ? माहौल देखकर तो ऐसा ही कुछ महसूस हो रहा है ! कुछ बरस पहले...
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