Sunday, February 13, 2011
(गीत) यादों के अवशेष रह गए !
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- स्वराज्य करुण सतरंगे सपनों का मेला वीरान हुआ संग्राम में , ...
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Saturday, February 12, 2011
(ग़ज़ल ) मुहब्बत का बँटवारा !
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- स्वराज्य करुण सपनों से जिंदगी इस तरह कट के रह गयी जैसे किसी राह से नज़र हट के रह गयी ! ...
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Friday, February 11, 2011
(कविता ) फिर भी अभिनय करते हैं !
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कैसे-कैसे लोग यहाँ जीवन के इस नाटक में, अभिनय करना नहीं जानते, फिर भी अभिनय करते हैं ! नहीं सफलता मिल पाती है स...
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Thursday, February 10, 2011
(गीत) खीर खाने का मौसम !
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-- स्वराज्य करुण अपने रोने का मौसम है , उनके गाने का...
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Wednesday, February 9, 2011
एक खुशनुमा मौसम की हत्या !
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स्वराज्य करुण वसंत के ख...
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Tuesday, February 8, 2011
(गीत) कुछ वासन्ती ख्वाब में !
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- स्वराज्य करुण जन्म से ही जी रहे दर्द के सैलाब में , च...
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Monday, February 7, 2011
दो तरह के किसान !
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-- स्वराज्य करुण कहते हैं - ...
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