Sunday 6 January 2013

दुष्कर्म ...दुष्कर्म ...और दुष्कर्म !

              दुष्कर्म ....दुष्कर्म ...और दुष्कर्म ... ! इन दिनों देश की चारों दिशाओं में घूम फिर कर यही एक शब्द बारम्बार गूँज रहा है .. ! यह सच है कि माताओं -बहनों और बेटियों के मान-सम्मान की रक्षा हर कीमत पर होनी चाहिए और उन्हें दुष्कर्म का शिकार बनाने वाले दरिन्दों  को कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए ,लेकिन हमें इस बात पर भी विचार करना होगा कि दुष्कर्म की ऐसी घटनाएं समाज में क्यों बढ़ रही हैं ? कारणों की पड़ताल ज़रूरी है .मेरे ख्याल से इन घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-- 

(१ ) सिनेमा के परदे और अब छोटे परदे पर दिखाए जाने वाले छेड़छाड़ और बलात्कार के दृश्य और 'बीड़ी जलाई ले 'और 'मैं हूँ सेक्सी 'जैसे फूहड़ और बेशर्मी भरे फ़िल्मी गाने ,जिन्हें फिल्मों में स्वयं महिलाए ही गाती हैं और उन्हीं गानों पर ठुमके भी लगाती हैं (२ ) )-सिनेमा के ऐसे अश्लील दृश्यों में अभिनय करने वाले कलाकार ,चाहे वह पुरुष हों या महिला .आखिर वो ऐसा सीन करने से इनकार क्यों नहीं कर देते ? 
      (३)- शराब और दूसरी नशीली वस्तुओं का फलता-फूलता कारोबार .(४) देश में भ्रष्टाचार की काली... कमाई से पैदा हो रहे दानवी धन-पशु ,जो अपनी सफेदपोश डकैती के काले धन से ऐयाशी करना अपना राष्ट्रीय कर्त्तव्य मानते हैं .(५) - टेलीविजन चैनलों पर आ रहे बेतुके धारावाहिक ,जिनकी कहानियों में कई बार अश्लील संवादों की भरमार होती है (५ ) टी. व्ही. के परदे पर प्रायवेट चैनलों द्वारा प्रसारित हो रहे शराब के विज्ञापन 
                             (६) - स्कूल-कॉलेजों में नैतिक शिक्षा का अभाव ( आजकल शिक्षा में नैतिकता की बात को पिछड़ापन समझा जाता है ) (७ ) आधुनिकता के नाम पर अपने बेटे-बेटियों को देर रात तक होटलों,क्लबों और ढाबों में घूमने-फिरने ,खाने पीने की छूट देने वाले परिवार और हॉस्टल से बिना वजह देर रात बाहर रहने वाले विद्यार्थी ( अगर कोई रात्रिकालीन नौकरी नहीं कर रहा है या नहीं कर रही है , कोई नाईट कॉलेज से सम्बन्धित छात्र/छात्रा नहीं है ,तो आप ही बताइये - उसे देर रात कहाँ रहना चाहिए ?). (८ ) -विज्ञापनों में प्रदर्शित नंगे/ अधनंगे स्त्री-पुरुष ( आश्चर्य है कि कपड़ों के विज्ञापनों में भी नंगापन दिखाया जाता है ) इन सभी कारणों पर गौर करें तो समाज में दुराचार बढने के असली कारणों का खुलासा हो जाएगा !       -स्वराज्य करुण 


3 comments:

  1. बहुत सही बात कही है आपने .सार्थक अभिव्यक्ति @मोहन भागवत जी-अब और बंटवारा नहीं .


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  2. बिलकुल सही कहा आपने .सिनेमा और टी .वी चैनल पर कुछ बंदिश होना चाहिए . ये दृश्य उत्प्रेरक का काम करते है.नई पोस्ट :" अहंकार " http://kpk-vichar.blogspot.in

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  3. कारण तमाम है. समाधान भी आसान नहीं. एक पूर्णरूपेण समाज में बदलाव चाहिये.

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