Saturday 14 August 2010

समय की सच्चाई पर छह कविताएँ

        (१)
    हमारे समय का सच तो
    आज यही है कि
    हमें अपने अलावा हर कोई
    झूठा लगता है ,
    जब हम देखते हैं आईना
     तो हम नहीं , यह आईना
     ही टूटा लगता है .

  
            (२)
      हमारे समय का एक सच
      यह भी है कि
      हम ढूंढते हैं सच्चाई
      एक दूसरे की आखों में ,
      सच तो यह है कि
      उसे तो हमने कब से
      डाल रखा है - झूठ और फरेब
      की सलाखों में .
     

             (३)
       हमारा समय
       चालाकी और चालबाजी के
       हथियारों से लैस है,
       जिसके हाथों में है लाठी
        उसकी ही भैंस है .
   

              (४)

       हमारे समय का 
       सबसे बड़ा सच
       यही है कि
       एक झूठ को सौ बार कहो तो
       वह सच हो जाता है और
       एक सच को हज़ार बार कहो
       तो वह झूठ हो जाता है .   
 

               (५)
      सचमुच बहुत खौफनाक है
      हमारे समय का सच ,
      पहन कर मुखौटा वह
      झूठ का जुड़वां भाई बन गया है ,
      सच तो यह है कि
      ओढ़कर खामोशी ,
      यह समाज भी तमाशाई बन गया है .
      

                (६)
      हमारे समय का सच तो
      यह है कि सच बोलना अपराध है ,
      क़ानून और कचहरी की
      दहलीज़ पर पूरे ताम -झाम के
      साथ झूठ आबाद है .
                           स्वराज्य करुण

2 comments:

  1. अभिव्‍यक्ति का नया आयाम, बधाई. सच तो खरा सोना की तरह माना जाता है, जो बिना मिलावट के इस्‍तेमाल नहीं हो पाता.

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  2. sach to khare sone ki tarah hota hai, jo bina milaavat k istemaal nahi ho pata. sach hai, jhooth ka bhi apna mahatva hai. adarsh aur yatharth me fark hota hai. KRISHNA BHAGWAN KO BHI MAHABHARAT KA YUDDH JEETNE K LIYE CHHAL KA SAHARA LENA PADA. YUDHISTHIR TO YUDDH HAAR JATA. RAM KO BHI BAALI KA VADH CHHAL SE KARNA PADA. chhal bhi ek astra hai jiska jab jaruri ho tab upyog karna aana chahiye, varna yuddh jeete nahi jaa sakte, DHARMKSHETRE KURUKSHETRE KA YUDDH BHI NAHI.

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